ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा सरकार और ट्रस्ट से जवाब मांगा जाना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर क्या बोले रविदास मेहरोत्रा?
रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट से जवाब मांगा है। साथ ही विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट भी तलब की गई है। उनका कहना है कि अदालत की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सीबीआई जांच की मांग पर भी विचार करेगा। उनके अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कथित तौर पर शामिल बड़े लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
सीईओ की नियुक्ति पर भी जताई आपत्ति
राम मंदिर में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सपा विधायक ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब कथित चोरी का मामला अदालत में विचाराधीन है और जांच जारी है, तब नई नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। मेहरोत्रा का तर्क है कि जांच पूरी होने और अदालत का अंतिम फैसला आने से पहले किसी भी तरह की नियुक्ति से जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है।
आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
सपा विधायक ने कहा कि कथित आरोपियों की न्यायिक हिरासत तो लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन उनकी संपत्तियों की जांच या कथित गबन की रकम की बरामदगी को लेकर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य मामलों की तुलना में इस प्रकरण में अब तक वैसी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जैसी आमतौर पर देखने को मिलती है।
मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र आयोग की मांग
रविदास मेहरोत्रा ने उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित चोरी का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि देश के कई प्रमुख मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाए। यह आयोग देश के प्रमुख मंदिरों में दान और चढ़ावे की व्यवस्था की निगरानी करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाए। उन्होंने बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, महाकाल और केदारनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन संस्थानों के कामकाज की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता इमरान मसूद द्वारा समाजवादी पार्टी पर दिए गए बयान का जवाब देते हुए रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल दो सीटें मिली थीं, जिनमें से एक सीट पर समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कई सांसद समाजवादी पार्टी के सहयोग से जीतकर आए हैं। अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस बरगद का पेड़ है, तो समाजवादी पार्टी आम के पेड़ की तरह है, जो छाया भी देता है और फल भी। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट से जवाब मांगा है तथा एसआईटी की जांच रिपोर्ट भी तलब की है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। वहीं, मामले की आगे की दिशा अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!